कक्षा 12 गणित – अवकलज के अनुप्रयोग क्या है? (Application of Derivatives in Hindi) – NCERT

अवकलज के अनुप्रयोग क्या है? (Application of Derivatives Class 12 Maths in Hindi) : 

पहले हम अवकलज के अर्थ(Meaning) को समझते हैं। अवकलज(Derivatives) : →अवकलज संबंध किसी फलन(Functions) अथवा राशि के परिवर्तन कि दर से हैं। अर्थात अवकलज बताता हैं कि कोइ मान(Value) कितना तेजी से बदल रहा हैं। 

इस अध्याय(Chapter) में अवकलज का उपयोग करके निम्नलिखित समस्याओं(Problems) का समाधान(Solutions) किया जाता हैं। जैसे : 

  1. परिवर्तन का दर ज्ञात करना(Rate of Change) 
  2. Increasing and Decreasing)
  3. अधिकतम और न्यूनतम (Maxima and Minima)
  4. स्पर्श रेखा (Tangent और अभिलंब(Normal)
  5. अनुमान(Approximation) 

यदि अनुप्रयोग की बात करें तो , ऊपर दिए गए समस्याओं का हल करना ही अनुप्रयोग(Application) कहलाता हैं। आज हम इस अध्याय में “अवकलज के अनुप्रयोग” के सभी गणितीय सिद्धांतो , नियमों एवं सूत्रों(Formulas) को समझेंगे , ताकि इससे जुड़े सभी प्रश्नावली(Exercise) के प्रश्नों का हल सरल तरीके से कर सकें । 

Class 12 Maths Chapter 6 Hindi Medium Ncert  – अवकलज के अनुप्रयोग ।

इस अध्याय में हम मुख्य रूप से किसी फलन के परिवर्तन की दर ,वर्धमान एवं ह्रासमान, उच्चतम एवं निम्नतम , स्पर्श रेखा (Tangent) , अभिलंब(Normal) , अनुमान(Approximation) आदि  का अध्ययन करते है और इन्ही पर आधारित प्रश्न पूछे जाते है।

अवकलज (Derivative) का प्रयोग करके , हम जानते है  कि कोई फलन कहाँ बढ़ रहा है, कहाँ घट रहा है, और किसी बिंदु पर उसका मान सबसे ज्यादा या सबसे कम हो जाता है। हम यह भी जानते है कि किसी भी राशि में जो बदलाव होता है, वह किस गति से हो रहा है।

1.राशियों के परिवर्तन की दर क्या होता हैं? 

(Rate of Change of Quantities)

राशियों के परिवर्तन की दर (Rate of Change of Quantities) का अर्थ है— किसी एक राशि (Quantity) के बदलने पर दूसरी राशि कितनी तेजी से बदल रही है।

यदि कोई राशि \(y\), दूसरी राशि \(x\) पर निर्भर करती है, अर्थात् \(y = f(x)\), तो \(x\) के सापेक्ष \(y\) के परिवर्तन की दर \(\frac{dy}{dx}\) होती है और यही \(y\) का \(x\) के सापेक्ष Rate of Change कहलाती है।

जैसे : 

यदि किसी वृत्त का क्षेत्रफल \(A = \pi r^2\) है, तो त्रिज्या के सापेक्ष क्षेत्रफल की परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए।

 
दिया है, \(A = \pi r^2\)

दोनों पक्षों का \(r\) के सापेक्ष अवकलन करने पर,

\(\frac{dA}{dr} = 2\pi r\)

अतः त्रिज्या \(r\) के सापेक्ष क्षेत्रफल की परिवर्तन की दर \(2\pi r\) होगी।

 
इससे स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे वृत्त की त्रिज्या बढ़ती है, उसका क्षेत्रफल \(2\pi r\) की दर से बढ़ता है।

 

Note : \(A = \pi r^2\)

अब \(r\) के सापेक्ष अवकलन करते हैं।

\(\frac{dA}{dr} = \frac{d}{dr}(\pi r^2)\)

\(\pi\) एक स्थिरांक है, इसलिए इसे बाहर निकालते हैं:

\(= \pi \cdot \frac{d}{dr}(r^2)\)

\(= \pi \cdot 2r\)

\(= 2\pi r\)

 

2.वर्धमान और ह्रासमान फलन क्या होता हैं? – Increasing and Decreasing Function in Hindi Class 12 Maths 

जब किसी फलन (Function) का मान \( x \) के बढ़ने पर बढ़ता है, तो उसे वर्धमान फलन (Increasing Function) और  जब \( x \) के बढ़ने पर फलन का मान घटता हैं , तो उसे ह्रासमान फलन (Decreasing Function) कहते हैं।

मान लीजिए कोई फलन \(f\), किसी अंतराल \(I\) में परिभाषित है।

वर्धमान फलन (Increasing Function): फलन \(f\), अंतराल \(I\) में वर्धमान कहलाता है यदि प्रत्येक \(x_1, x_2 \in I\) के लिए, जहाँ \(x_1 < x_2\), तब \(f(x_1) \leq f(x_2)\) हो।

ह्रासमान फलन (Decreasing Function): फलन \(f\), अंतराल \(I\) में ह्रासमान कहलाता है यदि प्रत्येक \(x_1, x_2 \in I\) के लिए, जहाँ \(x_1 < x_2\), तब \(f(x_1) \geq f(x_2)\) हो।

अर्थात
यदि \(f(x_1) < f(x_2)\), तो फलन Strictly Increasing कहलाता है तथा यदि \(f(x_1) > f(x_2)\), तो फलन Strictly Decreasing कहलाता है।

Class 12 NCERT Maths Notes in Hindi

वर्धमान फलन का उदाहरण :

मान लीजिए \(f(x) = x^2\)

अब \(x_1 = 1\), \(x_2 = 2\), जहाँ \(x_1 < x_2\)

\(f(1) = 1,\quad f(2) = 4\)

यहाँ \(f(1) < f(2)\), अतः फलन वर्धमान है।

यदि :

  • \( x = 1, \; f(x) = 2 \)
  • \( x = 2, \; f(x) = 4 \)
  • \( x = 3, \; f(x) = 6 \)

यहाँ \( x \) और \( f(x) \) दोनों बढ़ रहे हैं, इसलिए यह वर्धमान फलन है। मतलब →

x=1 तो f(x) = 2

x=2 तो f(x) = 4

x=3 तो f(x) = 6  , यहाँ f(x) के मान बढ़ रहा हैं, इसलिए यह वर्धमान है।

ह्रासमान फलन का उदाहरण :

मान लीजिए \(f(x) = -x\)

अब \(x_1 = 1\), \(x_2 = 2\)

\(f(1) = -1,\quad f(2) = -2\)

यहाँ \(f(1) > f(2)\), अतः फलन ह्रासमान है।

ह्रासमान फलन को इस प्रकार जानिए :

  • \( x = 1, \; f(x) = 6 \)
  • \( x = 2, \; f(x) = 4 \)
  • \( x = 3, \; f(x) = 2 \)

यहाँ \( x \) बढ़ रहा है लेकिन \( f(x) \) घट रहा है, इसलिए यह ह्रासमान फलन है। मतलब →

  • x = 1 तो f(x)=6 हुवा हैं।
  • x=2 तो f(x) = 4 हुवा हैं।
  • x=3 तो f(x) = 2 हुवा हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि f(x) का मान घट रहा हैं इसलिए यह ह्रासमान हैं।

 

ध्यान दें(Notes) : यहाँ \(x_1\) तथा \(x_2\) के मान समझाने के लिए लिए जाते हैं। हम \(x_1 < x_2\) की शर्त को पूरा करते हुए \(x_1\) और \(x_2\) के लिए कोई भी मान ले सकते हैं, जैसे \(x_1 = 1\) तथा \(x_2 = 2\) लिया गया है। आप अपनी सुविधा के अनुसार कोई भी अन्य मान भी ले सकते हैं।

कुल जमा बात यह है कि  \( x \) बढ़ रहा है (जैसे \( 1 \rightarrow 2 \rightarrow 3 \))

  • अगर \( f(x) \) भी बढ़े → वर्धमान फलन।
  • अगर \( f(x) \) घटे → ह्रासमान फलन।

 

अवकलज से पहचान करने के लिए निम्न दो बातों का ध्यान रखें ।

  • \( f'(x) > 0 \) → वर्धमान फलन हैं।
  • \( f'(x) < 0 \) → ह्रासमान फलन हैं।

एक लाइन में याद रखें :

  • \( x \) बढ़े और \( f(x) \) भी बढ़े → वर्धमान।
  • \( x \) बढ़े और \( f(x) \) घटे → ह्रासमान।

 

3. उच्चतम और निम्नतम – Maxima and Minima  क्या हैं Class 12 Maths 

उच्चतम (Maximum):  यदि कोई फलन $f(x)$, बिंदु $x = a$ के आस-पास के सभी बिंदुओं के लिए इस प्रकार हो कि
\[
f(a) \geq f(x)
\]
तो $f(a)$ को उस बिंदु पर स्थानीय उच्चतम मान (Local Maximum Value)} कहा जाता है।

Maxima class 12 Maths in Hindi

यदि किसी फलन f(x) के लिए बिंदु a के आस-पास के सभी मानों पर f(a) ≥ f(x) हो तो इसका अर्थ हैं उस बिंदु पर फलन का मान अपने आसपास के सभी मानों से बड़ा या बराबर है।

यहाँ “आस-पास” का तात्पर्य a के बहुत निकट स्थित x के मानों से है, अर्थात ऐसे मान जो a से थोड़ा कम या थोड़ा अधिक हों।

इस स्थिति में हम केवल एक छोटे क्षेत्र (Neighborhood) के मानों की तुलना करते हैं, न की पूरे परिभाषित क्षेत्र की । जब उस छोटे क्षेत्र में f(a)  सबसे बड़ा मान होता हैं, तब बिंदु a को फलन का स्थानीय उच्यतम (Maximum) कहा जाता हैं।

उदाहरण के लिए, यदि किसी फलन का ग्राफ किसी बिंदु पर ऊपर की ओर एक चोटी (peak) बनाता है, तो उस चोटी पर स्थित बिंदु के आसपास के सभी बिंदुओं पर फलन का मान उससे कम होता है। → इस स्थिति को गणितीय रूप में f(a) ≥ f(x) द्वारा व्यक्त किया जाता है।

 

निम्नतम (Minimum): यदि कोई फलन $f(x)$, बिंदु $x = a$ के आस-पास के सभी बिंदुओं के लिए इस प्रकार हो कि
\[
f(a) \leq f(x)
\]
तो $f(a)$ को उस बिंदु पर स्थानीय निम्नतम मान (Local Minimum Value)} कहा जाता है।

संक्षेप में:

\[
f(a) \geq f(x) \Rightarrow \text{Maximum}
\]

\[
f(a) \leq f(x) \Rightarrow \text{Minimum}
\]

 

4.एक संवृत अंतराल में किसी फलन का उच्चतम और निम्नतम मान क्या होता हैं ?

(Maxima and Minima values of a functions in a Closed Interval)

किसी फलन (Function) का अध्ययन करते समय यह समझना बहुत महत्वपूर्ण होता है कि वह फलन अपने पूरे क्षेत्र में कहाँ सबसे बड़ा और कहाँ सबसे छोटा मान देता है।

जब हम किसी फलन को एक संवृत अंतराल (Closed Interval) में देखते हैं, तो हम उसके अधिकतम (Maximum) और न्यूनतम (Minimum) मानों को विशेष रूप से खोजते हैं।

 

🔷संवृत अंतराल (Closed Interval) क्या होता है?

यदि किसी फलन को [a, b] अंतराल में परिभाषित किया गया है, तो इसका अर्थ है कि इसमें दोनों सिरों a और b को भी शामिल किया जाता है। ऐसे अंतराल को संवृत अंतराल कहते हैं।

🔷 अधिकतम और न्यूनतम मान क्या होते हैं?

जब किसी फलन f(x) का मान पूरे अंतराल [a, b] में सबसे बड़ा होता है, तो उसे अधिकतम मान (Maximum Value) कहते हैं। इसी प्रकार, जब फलन का मान पूरे अंतराल में सबसे छोटा होता है, तो उसे न्यूनतम मान (Minimum Value) कहते हैं।

कुल बात यह हैं कि : 

एक संवृत अंतराल में किसी भी फलन का अधिकतम या न्यूनतम मान तीन जगहों पर हो सकता है।

  • अंतराल के सिरों पर, यानी x = a या x = b
  • अंदर के किसी critical point पर, जहाँ f'(x) = 0 या derivative अस्तित्व में नहीं होता
  • उन सभी बिंदुओं में से जहाँ फलन का मान सबसे बड़ा या सबसे छोटा हो

🔷 ज्ञात करने की प्रक्रिया →

  1. f(x) का अवकलज (derivative) निकालें।
  2. f'(x) = 0 हल करके critical points प्राप्त करें।
  3. a, b और सभी critical points पर f(x) का मान निकालें।
  4. सबसे बड़ा मान = Maximum
  5. सबसे छोटा मान = Minimum

Note : संवृत अंतराल में किसी फलन का अधिकतम और न्यूनतम मान निकालना calculus का एक महत्वपूर्ण भाग है।

निष्कर्ष(Conclusions) : 

इस अध्याय में आपने कक्षा 12 गणित के “अवकलज के अनुप्रयोग (Applications of Derivatives)” से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया। इसमें मुख्य रूप से राशियों के परिवर्तन की दर (Rate of Change), वर्धमान एवं ह्रासमान फलन (Increasing and Decreasing Functions), तथा उच्चतम और निम्नतम मान (Maxima and Minima) जैसी अवधारणाओं को समझा गया।

अवकलज की सहायता से हम यह ज्ञात कर सकते हैं कि कोई फलन कहाँ बढ़ रहा है, कहाँ घट रहा है, तथा किस बिंदु पर उसका मान अधिकतम या न्यूनतम होता है। इसके अतिरिक्त, संवृत अंतराल में किसी फलन के अधिकतम एवं न्यूनतम मान ज्ञात करने की प्रक्रिया को भी समझे। उम्मीद है कि इस अध्याय के माध्यम से आपको अवकलज के अनुप्रयोग से संबंधित सभी महत्वपूर्ण सिद्धांत, नियम एवं प्रश्नों को समझने में सहायता मिली होगी।

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