संबंध एवं फलन क्या होता हैं? – NCERT Math Relation and Function Class 12 Notes in Hindi

संबंध एवं फलन क्या होता हैं? – NCERT Math Relation and Function Class 12 Notes in Hindi :

यदि आप कक्षा 12 के छात्र हैं और गणित के अध्याय(Chapter)संबंध एवं फलन (Relation and Function)” से संबंधित जरूरी अवधरणाओं(Concepts) के बारे में जानकारी चाहिए तो यह पेज आपके लिए महत्पूर्ण हैं।

इस अध्याय में हम समझेंगे कि संबंध (Relation) एवं फलन (Function) क्या हैं और  इनके विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं। इस Chapter से जुड़े उन सभी बातों को जानेंगे जो प्रश्नावली को हल करने के लिए आवश्यक होता हैं। इसके अलावा Relation and Function  से सम्बन्ध रखने वाले चीजें जैसे – समुच्चय (Set), आर्डर युग्म (Ordered Pair),  क्षेत्र (Domain) क्षेत्र (Range) आदि जैसे बातों को सरल भाषा में समझेंगे।

संबंध (Relation) क्या है? – Class 12 Maths Chapter 1 Notes in Hindi.

“संबंध” (Relation) एक बहुत महत्वपूर्ण अवधारणा है। जब हम दो समुच्चयों (Sets) के तत्वों(Elements) को आपस में जोड़ते हैं, तो जो संबंध बनता है, उसे ही  Relation कहा जाता है।

कक्षा 12 के इस अध्याय में संबंध की अवधारणा को कार्तीय गुणनफल (Cartesian Product) के आधार पर समझाया गया है। यदि आपको Relation अच्छी तरह समझ में आ गया, तो Function, Composition और Inverse भी आसानी से समझ आएँगे।

संबंध (Relation) की परिभाषा क्या है?

यदि A और B दो समुच्चय हैं, तो A × B के किसी भी उपसमुच्चय (Subset) को A से B का संबंध (Relation) कहते हैं।

अथवा

यदि A और B दो समुच्चय (Sets) हैं, तो A × B (कार्तीय गुणनफल) के किसी भी उपसमुच्चय (Subset) को A से B का संबंध (Relation) कहते हैं।

👉 आसान भाषा में  – जब हम किसी Set A के तत्वों को कोई Set B के तत्वों से जोड़ते हैं, तो जो जोड़ी (Ordered Pair) बनती है, वही जोड़ी संबंध कहलाती है।

गणितीय रूप : यदि R ⊆ A × B, तो R, A से B का संबंध है।

 संबंध की विशेषताएँ : 

  • संबंध हमेशा Ordered Pair के रूप में लिखा जाता है।
  • हर संबंध A × B का हिस्सा होता है।
  • संबंध में सभी जोड़े लेना आवश्यक नहीं है।
  • संबंध खाली (Empty) भी हो सकता है।

संबंध के प्रकार : Types of Relation in Hindi Class 12.

कक्षा 12 NCERT गणित के अनुसार Relation निम्न प्रकार के होते है।

1️⃣ रिक्त संबंध (Empty / Void Relation)

2️⃣ सार्वत्रिक संबंध (Universal Relation)

3️⃣ स्वतुल्य संबंध (Reflexive Relation)

4️⃣ सममित संबंध (Symmetric Relation)

5️⃣ संक्रामक संबंध (Transitive Relation)

6️⃣ तुल्यता संबंध (Equivalence Relation)

 

रिक्त संबंध (Empty / Void Relation) – Class 12 Maths Chapter 1 in Hindi.

गणित में जब हम दो समुच्चयों (Sets) के तत्वों के बीच संबंध (Relation) बनाने की बात करते हैं, तो कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई भी जोड़ी (Ordered Pair) संबंध में शामिल नहीं होती।
इस स्थिति को रिक्त संबंध (Empty / Void Relation) कहा जाता है।

परिभाषा (Definition) :  यदि कोई Relation R किसी Set A और Set B पर ऐसा हो कि R में कोई भी Ordered Pair मौजूद न हो, तो इसे रिक्त संबंध (Empty / Void Relation) कहते हैं।

गणितीय रूप में: R = ∅

ध्यान दें: ∅ का मतलब है Null Set / खाली सेट।

जैसे :

A = {1, 2, 3}
B = {4, 5, 6}

यदि हम कहते हैं कि “A के तत्वों का B के तत्वों से कोई संबंध नहीं है”, तो R = ∅ है।
यानि, कोई भी (a, b) जोड़ी A × B से संबंध में नहीं आती।

उदाहरण (Example) :  A = {1, 2}, B = {3, 4}
R = ∅
यह रिक्त संबंध (Empty Relation) है क्योंकि R में कोई Ordered Pair नहीं है।

माना कि समुच्चय A = {शिक्षक}, समुच्चय B = {विद्यार्थी}
यदि किसी शिक्षक का किसी विद्यार्थी से कोई विशिष्ट विषय में संबद्धता नहीं है, तो यह रिक्त संबंध है।

रिक्त संबंध की शेषताएँ (Features) :

  • R हमेशा A × B का उपसमुच्चय होता है।
  • Ordered Pair की संख्या = 0
  • Relation में कोई भी जोड़ा उपस्थित नहीं होता।
  • यह Relation किसी भी Set पर परिभाषित हो सकता है।
विशेषता विवरण
Name रिक्त संबंध / Empty Relation
Definition R में कोई भी Ordered Pair न हो
Symbol R = ∅
Ordered Pairs 0
Usage Conceptual Example, Basis for other relations

 

सार्वत्रिक संबंध (Universal Relation) :

जैसा कि हम जानते है कि गणित में Relation का मतलब होता है दो Sets के बीच किसी प्रकार का संबंध।
जब किसी Set A पर Relation ऐसा हो कि A × A के सभी Ordered Pairs R में शामिल हों, तो इसे सार्वत्रिक संबंध (Universal Relation) कहते हैं।

परिभाषा (Definition) :  यदि Set A के लिए Relation R ऐसा हो कि R = A × A, यानी A के सभी elements के सभी possible pairs R में मौजूद हों, तो इसे Universal Relation कहते हैं।

Mathematical Form:
R = { (a,b) : a ∈ A, b ∈ A }

ध्यान दें: Universal Relation में कोई भी Ordered Pair नहीं छोड़ा जाता। यह Relation हमेशा Reflexive हो सकता है और Symmetric या Transitive भी हो सकता है।

आसान भाषा में समझें तो , सोचिए कि आपके पास Set A के सभी elements हैं। यदि Relation में हर element दूसरे element से जुड़ा है, और खुद से भी जुड़ा है, तो यह Universal Relation कहलाता है।

उदाहरण :
A = {1, 2}
A × A = {(1,1), (1,2), (2,1), (2,2)}
R = A × A → Universal Relation है।

  • शहरों का Road Network: मान लीजिए Set A = {City A, City B, City C}। अगर सभी शहरों के बीच direct सड़क मार्ग है, तो यह Universal Relation है।
  • Friend Circle: यदि किसी group में हर व्यक्ति हर दूसरे व्यक्ति को जानता है और उनके बीच संबंध है, तो यह भी Universal Relation माना जा सकता है।

गणितीय रूप में समझिए:

यदि A = {x, y}
R = {(x,x), (x,y), (y,x), (y,y)} → Universal Relation है।

यदि A = {1,2,3} तो , 
R = {(1,1),(1,2),(1,3),(2,1),(2,2),(2,3),(3,1),(3,2),(3,3)} → Universal Relation हैं। 

Universal Relation की विशेषताएँ : 

  • R हमेशा A × A का पूरा subset होता है।
  • Ordered Pair की संख्या = n² (n = number of elements in A)
  • Universal Relation हमेशा Reflexive हो सकता है।
  • Symmetric और Transitive भी हो सकता है। 

 

स्वतुल्य संबंध  (Reflexive Relation)  : 

Reflexive Relation वह Relation होता है जिसमें किसी Set A के हर तत्व a के लिए (a, a) Relation R में मौजूद हो।
मतलब, हर element खुद से जुड़ा होना चाहिए।

परिभाषा (Definition) : यदि किसी Set A के लिए Relation R में प्रत्येक a ∈ A के लिए (a, a) ∈ R हो, तो इसे स्वतुल्य संबंध (Reflexive Relation) कहते हैं।

गणितीय रूप में :
R is Reflexive if (a,a) ∈ R ∀ a ∈ A

  • हर element अपने आप से जुड़ा होना चाहिए।
  • Self-pair (a, a) हमेशा Relation में मौजूद होना चाहिए।

जैसे :
A = {1, 2, 3}
R = {(1,1),(2,2),(3,3),(1,2)} → Reflexive Relation

4. Real-life Example के अनुसार समझे तो

  • हर छात्र अपने आप को जानता है।
  • यदि कोई social network में हर user खुद को भी follow करता है → Reflexive Relation

अन्य उदाहरण :

यदि A = {x, y, z}
R = {(x,x), (y,y), (z,z), (x,y)} → Reflexive

यदि A = {1,2,3,4}
R = {(1,1),(2,2),(3,3),(4,4),(1,2),(2,1)} → Reflexive है।

 

सममित संबंध (Symmetric Relation) : 

जब किसी Set A में दो elements a और b के बीच एक संबंध (a, b) मौजूद हो, और उसके उलट (b, a) भी मौजूद हो, तो इसे सममित संबंध (Symmetric Relation) कहते हैं।

परिभाषा (Definition) : यदि Set A पर Relation R के लिए : (a,b) ∈ R ⇒ (b,a) ∈ R
तो इसे Symmetric Relation कहते हैं।

महत्वपूर्ण बातें:

  • Self-pair (a, a) Symmetric Relation में optional है।
  • Symmetric Relation में केवल pairs का उल्टा मौजूद होना जरूरी है।
  • अगर कोई element किसी दूसरे element से जुड़ा है, तो दूसरा element भी पहले element से जुड़ा होना चाहिए।

जैसे :
1. A = {1, 2}
R = {(1,2),(2,1)} → Symmetric

2. A = {X, Y, Z}
R = {(X,Y),(Y,X),(Y,Z),(Z,Y)} → Symmetric

  • Friendship Relation: यदि A और B दोस्त हैं, तो B और A भी दोस्त होंगे।
  • Mutual Agreement: दो पार्टियों के बीच कोई agreement Symmetric Relation कहलाता है।
  • Business Partnerships: यदि कंपनी A और कंपनी B साझेदारी करती हैं, तो दोनों को समान अधिकार मिलते हैं।

यदि A = {1,2,3}
R = {(1,2),(2,1),(2,3),(3,2)} → Symmetric Relation हैं।

यदि : A = {a,b,c}
R = {(a,b),(b,a),(b,c),(c,b),(a,a)} → Symmetric Relation हैं।

 

संक्रामक संबंध (Transitive Relation)  : 

जब हम किसी Set के elements के बीच संबंध (Relation) की बात करते हैं, तो यह जरूरी होता है कि हम समझें कि ये संबंध कैसे एक-दूसरे से जुड़े हैं।

संक्रामक संबंध (Transitive Relation) ऐसे संबंध को कहते हैं जिसमें अगर कोई element किसी दूसरे element से जुड़ा है और वह दूसरा element तीसरे element से जुड़ा है, तो पहला element अपने आप तीसरे element से भी जुड़ा माना जाता है।

साधारण शब्दों में कहें तो, “अगर A से B जुड़ा है और B से C जुड़ा है, तो A से C भी जुड़ा होगा”।

यह property Set Theory और Relation के concepts में बहुत महत्वपूर्ण है और इसे समझना Class 12 के लिए बेहद जरूरी है।

अगर दादा पिता से जुड़ा है और पिता पुत्र से जुड़ा है, तो दादा सीधे पुत्र से भी जुड़ा माना जाता है।

यदि कोई बिजली Supplier A, B को सप्लाई करता है और B, C को भी सप्लाई करता है, तो A से C तक supply chain जुड़ी हुई मानी जाएगी

इस संबंध के उदाहरण :

माना कि :

Set A = {1, 2}

Set B = {3, 4}

Set C = {5, 6}

Relation R = {(1,3), (2,4), (3,5), (4,6), (1,5), (2,6)}

1 > 3 > 5 ⇒ 1 > 5 ✅

2 > 4 > 6 ⇒ 2 > 6 ✅

 

तुल्यता संबंध(Equivalence Relation) :

Set A पर Relation R को Equivalence Relation तभी कहते हैं जब यह तीन properties satisfy करे:

  • Reflexive (स्वतुल्य): (a,a) ∈ R ∀ a ∈ A
  • Symmetric (साम्य/सममित): यदि (a,b) ∈ R तो (b,a) ∈ R
  • Transitive (संक्रामक): यदि (a,b) ∈ R और (b,c) ∈ R तो (a,c) ∈ R

तीनों conditions पूरी होने पर Relation को Equivalence Relation कहा जाता है।

अर्थात

यह Relation Reflexive, Symmetric और Transitive सभी है, इसलिए Equivalence Relation है।

फलन(Function) किसे कहते है ? – What is Function in Hindi.

गणित में “फलन” केवल एक परिभाषा नहीं है, बल्कि यह आधुनिक गणित की नींव है। बीजगणित, कलन (Calculus), सांख्यिकी, यहाँ तक कि भौतिकी और अर्थशास्त्र — सभी क्षेत्रों में फलन की अवधारणा केंद्रीय भूमिका निभाती है।

फलन को संबंध (Relation) का एक विशेष रूप बताया गया है। लेकिन वास्तव में इसे समझने के लिए हमें पहले यह जानना होगा कि फलन की आवश्यकता क्यों पड़ी।

मान लीजिए हमारे पास दो समुच्चय (Sets) हैं:

X = {विद्यार्थियों का समूह है}

Y = {उनके रोल नंबरों का समूह है}

अब यदि प्रत्येक विद्यार्थी का केवल एक ही रोल नंबर है, तो यह व्यवस्था एक सुव्यवस्थित प्रणाली है।

लेकिन यदि किसी एक विद्यार्थी के दो रोल नंबर हों — तो क्या यह व्यवस्था सही नहीं मानी जाएगी?

यही “एक इनपुट → एक आउटपुट” का सिद्धांत फलन का मूल आधार है।

फलन की परिभाषा – Definition of Function .

मान लीजिए दो  समुच्चय X और Y हैं। यदि X से Y में ऐसा संबंध f हो जिसमें X के प्रत्येक अवयव का Y में केवल एक ही प्रतिबिंब (image) हो, तो इस संबंध को फलन (Function) कहते हैं।

अर्थात : f : X → Y

  • X = Domain
  • Y = Co-domain
  • f(x) = x का प्रतिबिंब (Image)

 

फलन वह विशेष संबंध है जिसमें Domain के प्रत्येक तत्व का Co-domain में एक और केवल एक प्रतिबिंब होता है।

फलन की मूल शर्त निम्न प्रकार रहना चाहिए: 

  • ✔ Domain का प्रत्येक तत्व जुड़ा होना चाहिए।
  • ✔ प्रत्येक तत्व का केवल एक ही image होना चाहिए।
  • ❌ एक input के दो अलग-अलग output नहीं होना चाहिए।

मान लीजिए   कि –

X = {1,2,3}
Y = {a,b,c}

f(1)=a
f(2)=b
f(3)=c

यह एक फलन है क्योंकि:

  • ✔ X के प्रत्येक तत्व का एक ही image है।
  • ✔ कोई भी तत्व दो अलग-अलग image नहीं दे रहा।

यदि f(1)=a और f(1)=b , तो यह फलन नहीं होगा , क्योंकि यहाँ 1 के दो image हैं, जो फलन की शर्त का उल्लंघन करता है। अतः यह फलन नहीं है।

संबंध और फलन में क्या अंतर है?

हर फलन एक संबंध है, लेकिन हर संबंध फलन नहीं होता। क्योंकि संबंध में एक तत्व के अनेक image हो सकते हैं, जबकि फलन में ऐसा संभव नहीं है।

फलन का उपयोग एवं महत्व : 

फलन का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे:

  • ग्राफ बनाने में।
  • समीकरण हल करने में।
  • कलन (Differentiation और Integration) में।
  • वास्तविक जीवन की समस्याओं को मॉडल करने में।

 

फलन के प्रकार (Types of Functions) 

कक्षा 12 की NCERT गणित पुस्तक में फलनों का वर्गीकरण उनके गुणों के आधार पर किया गया है। यहाँ हम सभी प्रकारों को एक-एक करके उदाहरण सहित जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं।  कक्षा 12 NCERT के आधार पर फलन निम्न प्रकार के होते हैं।

 

 

1️⃣ एक-एक फलन (One-One / Injective Function)

2️⃣ अनेक-एक फलन (Many-One Function)

3️⃣ आच्छादक फलन (Onto / Surjective Function)

4️⃣ Into फलन (Into Function)

5️⃣ एक-एक तथा आच्छादक फलन (One-One and Onto / Bijective Function)


1️⃣ एक-एक फलन (One–One / Injective Function)

मान लें f : X → Y एक फलन है।
यदि X के किसी भी दो अवयव x₁ और x₂ के लिए

f(x₁) = f(x₂) ⇒ x₁ = x₂ ,तो f को एक-एक फलन कहते हैं। अर्थात भिन्न अवयवों के प्रतिबिंब भी भिन्न होंगे।

जैसे :

यदि X = {1,2,3}
Y = {a,b,c}

f(1)=a, f(2)=b, f(3)=c

यहाँ सभी images अलग हैं। अतः यह एक-एक फलन है।

यदि  f(x) = 3x + 2

तो  f(x₁) = f(x₂),
3x₁ + 2 = 3x₂ + 2 ⇒ x₁ = x₂
अतः यह एक-एक फलन है।

 


2️⃣ अनेक-एक फलन (Many–One Function)

परिभाषा : यदि X में दो भिन्न अवयव x₁ ≠ x₂ ऐसे हों कि f(x₁) = f(x₂) , तो f अनेक-एक फलन कहलाता है।

जैसे :

X = {1,2,3,4}
Y = {a,b}

f(1)=a, f(2)=a, f(3)=b, f(4)=b

यहाँ 1 और 2 का image समान है। अतः यह अनेक-एक फलन है।


3️⃣ आच्छादक फलन (Onto / Surjective Function)

परिभाषा : यदि Y के प्रत्येक अवयव y के लिए X में कम से कम एक x ऐसा हो कि f(x) = y ,अर्थात Range = Y, तो f आच्छादक फलन कहलाता है।

जैसे :

X = {1,2,3}
Y = {a,b,c}

f(1)=a, f(2)=b, f(3)=c

Y का प्रत्येक तत्व cover हो रहा है। अतः यह आच्छादक है।


4️⃣ Into फलन (Into Function)

परिभाषा :  यदि Y में कम से कम एक तत्व ऐसा हो जो किसी भी x का image न हो,
अर्थात Range ⊂ Y, तो f Into फलन कहलाता है।

जैसे :

X = {1,2,3}
Y = {a,b,c,d}

f(1)=a, f(2)=b, f(3)=c

d unused है। अतः यह Into फलन है।

 


5️⃣ एक-एक तथा आच्छादक फलन (Bijective Function)

परिभाषा : यदि कोई फलन एक-एक भी हो और आच्छादक भी हो,
तो उसे Bijective फलन कहते हैं।

जैसे :

X = {1,2,3}
Y = {a,b,c}

f(1)=a, f(2)=b, f(3)=c

✔ सभी image अलग
✔ Y पूरा cover
अतः यह Bijective फलन है।


 

निष्कर्ष(Conclusions) :

इस अध्याय में आपने कक्षा 12 गणित के महत्वपूर्ण विषय संबंध एवं फलन (Relation and Function) को सरल और व्यवस्थित रूप में समझा। आपने संबंध की मूल अवधारणा, उसकी परिभाषा, विशेषताएँ तथा विभिन्न प्रकार — जैसे Reflexive, Symmetric, Transitive और Equivalence Relation — के बारे में अध्ययन किया। साथ ही, फलन की परिभाषा, उसकी आवश्यक शर्तें और उसके प्रमुख प्रकारों को भी स्पष्ट उदाहरणों के माध्यम से जाना।

 यदि आप नियमित अभ्यास करें, परिभाषाओं को स्पष्ट रखें और उदाहरणों को ध्यान से समझें, तो बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से आने वाले प्रश्नों को आसानी से हल कर सकेंगे।

अंत में, सुझाव यही है कि आप इन नोट्स के साथ NCERT के प्रश्नों का अभ्यास अवश्य करें और प्रत्येक प्रकार के संबंध एवं फलन की पहचान करने का अभ्यास करते रहें।

 

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